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एक विचार जाति वर्ण के कारोबार पर

           जाति के ब्राह्मण, बिना शादी करने को लेकर कुछ दिन पहले मेरे पापा ने कहा कि वो (मेरे लिए) है तो कट्टर हिन्दू। आगे उन्होंने कहा कि आजकल जब खेती बाड़ी, व्यापार, नेता, राजनीति, बर्तन, गहने, कपड़े सिलना, बुनना, धोना, फर्नीचर, लोहा, बाल काटना, तेल, दूध आदि का कारोबार किसी भी जाति के लोग कर रहे हैं। तो अब बताइए किसी अनुष्ठान जैसे शादी, हवन आदि के पूजन पाठ, कोई भी जाति के लोग क्यों नहीं कर सकते?? जब पहले के जाति वर्ण के अनुसार लोग कारोबार ही नहीं करते हैं, तो पूजन पाठ में ब्राह्मण जाति ही क्यों?? फिर तो प्राचीन समय के अनुसार ब्राह्मणों को भी पूजन पाठ, भिक्षा के अलावा अन्य कारोबार नहीं करने चाहिए। लेकिन उन्होंने तो अपने लिए प्राचीन परंपराएं बदल ली क्योंकि वे अन्य जातियों के कारोबार करते हैं। तो अन्य जातियां क्यों नहीं उनका कारोबार कर सकती हैं? मैं कहता हूं कि बिल्कुल कर सकते हैं। उनका ये तर्क सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

    ये सुनकर (जाति के ब्राह्मण बिना शादी करने का) मेरा, परिवार के साथ पिछले 10 सालों का संघर्ष 90% सफल हो गया है। क्योंकि मां बाप के विचारों में बदलाव आ गया है। मैंने तो अपने मां बाप को सुधार लिया। यही मेरा उद्देश्य रहता है कि सिर्फ अपने परिवार को सुधारना है। परिवार मेरा उद्देश्य समझ गया है। कि इसका संघर्ष एक विचारधारा से है।

    ये तो सभी जानते हैं कि कुछ सालों बाद तो बदलाव होना ही है। लेकिन अभी क्यों? और हम क्यों करें। धीरे-धीरे हो जाएगा। लेकिन मैं कहता हूं कि जब आप अपने में बदलाव करोगे। उस समय से आज के समय का अंतर गिन लेना। जितना भी समय का अंतर आएगा, उतने समय मैं आपकी विचारधारा से आगे रहूंगा। क्यों कि मैं उस समम बदलाव कर लिया था। और आपने आज किया। 

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